Kavita Jha

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खोजी मन

ये खोजी मन चला खोजने...
शांति और एकांत
मन में मचा है शोर
घटा छाई घनघोर
कहां भटकने को चला रे मनवा तूं
मन जब तक ना होगा शान्त
कहां मिलेगी शान्ति तुझे
मन को भटकने से रोक...
***
कविता झा'काव्या कवि'


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5 Comments

Fiza Tanvi

29-Sep-2021 07:46 PM

Good

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Shilpa modi

29-Sep-2021 04:09 PM

Nice

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Miss Lipsa

29-Sep-2021 02:58 PM

Wow

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